माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय ने शुरू किया नशा मुक्ति अभियान

माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय ने शुरू किया नशा मुक्ति अभियान, परिसर में नशा करते पकड़े जाने पर लगेगा ₹500 जुर्माना

मीरजापुर। माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय ने नशा मुक्त भारत अभियान के तहत युवाओं एवं समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और नशामुक्त, स्वस्थ तथा आत्मनिर्भर समाज के निर्माण के उद्देश्य से व्यापक जनजागरूकता अभियान का शुभारंभ किया है।

अभियान के प्रथम चरण में विश्वविद्यालय परिसर को पूर्णतः नशामुक्त बनाने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नशे का सेवन करने वाले लोगों को परामर्श देकर नशा छोड़ने और परिसर को नशामुक्त बनाए रखने में सहयोग की अपील की गई।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जागरूकता और समझाइश के बावजूद यदि कोई व्यक्ति विश्वविद्यालय परिसर में नशे का सेवन करते हुए सीसीटीवी कैमरों में पाया जाता है, तो विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार उस पर ₹500 का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

शनिवार को कुलपति प्रो. शोभा गौड़ की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के आसपास स्थित गांवों में भी जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। पोस्टर और बैनरों के साथ निकाली गई जागरूकता रैली के माध्यम से ग्रामीणों को नशे के सामाजिक, शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई तथा नशे का सेवन करने वालों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. शोभा गौड़ ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना भी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय युवाओं और ग्रामीण समाज में नशे के प्रति जागरूकता फैलाकर नशामुक्त, स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि जनसहभागिता, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा। विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की।

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