यूपी के 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सौगात, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

यूपी के 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सौगात, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी

बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख और माध्यमिक व संस्कृत शिक्षा के 48 हजार से अधिक कर्मियों को मिलेगा लाभ, सरकार खर्च करेगी 51.11 करोड़ रुपये सालाना

लखनऊ, 27 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पांच कालिदास मार्ग पर हुई कैबिनेट की बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से प्रदेश के 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को लाभ मिलेगा।

योगी सरकार की इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार सालाना 51.11 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार वहन करेगी।

बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख कर्मचारियों को लाभ

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन विद्यालयों तथा समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत 1,22,304 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इनके लिए सरकार लगभग 36.69 करोड़ रुपये सालाना खर्च करेगी।

उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा परिवार को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। कैबिनेट की मंजूरी के साथ सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा के 48 हजार कर्मी भी होंगे लाभान्वित

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इस पर सरकार प्रतिवर्ष लगभग 14.42 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

आयुष्मान भारत की दरों पर होगा कैशलेस उपचार

अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के अनुसार, योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके तहत सरकारी अस्पतालों और साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होकर उपचार कराने यानी आईपीडी (IPD) की सुविधा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की अनुमोदित दरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रति कर्मचारी सालाना 3,000 रुपये प्रीमियम के आधार पर राज्य सरकार योजना का खर्च वहन करेगी। इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

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